Monday, February 21, 2011

आमिर अजमल कसाब एक नाम जो अब मजाक का पर्याय बन गया है हमारे हिन्दुस्तान में

आमिर अजमल कसाब एक नाम जो अब मजाक का पर्याय बन गया है हमारे हिन्दुस्तान में, हजारो लोगो ने सीधा प्रसारण देखा और मिया कसाब को गोली चलाते हुए निहारा, कसाब पकड़ा गया मुंबई पुलिस के जवानों द्वारा और उनमे से बहुत से बहादुरों की जाने भी गयी, २४ महीने से ज्यादा हो गए और अब बाते चल रही है कि क्या कसाब सुप्रीम कोर्ट जायेगा उसर उधर भी सजा बरक़रार रहने पर बिना हिन्दुस्तानी नागरिकता के बावजूद भारत के राष्ट्रपति से माफ़ी की गुहार लगाएगा? एक और जहा हर दिन शहीदों के परिवार कसाब के मृत्यु दंड की उम्मीद कर रहे है दूसरी ओर जनाब कसाब के जेल में ऐश चल रहे है, पकिस्तान पूरे जोर शोर से कसाब का अस्तित्व पकिस्तान से मिटाने में लगा है
हेडली हिन्दुस्तान आता है रेकी कर के चला जता है, १० दह्शदगर्द मुंबई में घुसते है और कई लोगो को मौत की नींद सुला देते है, पुलिस आये दिन घोषणा करती है आतंकी हमला कर सकते है लेकिन साहब मजाल कोई पकड़ा जाये, घोटाले बाजो की सरकार में तंत्र इतना खोखला हो चूका है कि शक होता है ये जरुरत पड़ने पर देश के काम आएंगे भी कि नहीं या फिर अपने विदेशी सूत्रों के सहारे हिन्दुस्तान को किसी और के हाथों गिरवी रख कर भाग जायेंगे
महानगरो में बढ़ता अपराध छोटे शहरो में पनपता भ्रस्टाचार और गाँवो में बढ़ता असंतोष किस ओर ले जा रहा है देश को? विदेशी तत्व हमारे देश में आकर हमारे देशद्रोही लोगो को छुड़ाने के लिए आन्दोलन करते है, मशरूम जैसे एन जी ओ की आड़ में देश तोड़ने की साजिश रखते है और कुछ हिंसा का सहारा लेकर जनजीवन को अस्त व्यस्त करते है
कौन है दोषी? सरकार या हम? समय है अभी निर्णय लेने का यदि सरकार है दोषी तो बदल डालो निकम्मी सरकार को लेकिन यदि हम है दोषी ऐसी निक्कमी सरकार चुनने के के बदलो अपनी सोच और सुधारो भविष्य अपनी मातृभूमि का, यदि सरकार कहती है की वो रक्षा नहीं कर सकती तो साफ़ करे और हथियारों के ऊपर से लाइसेंस पोलिसी हटा ले, चलने दे जंगल राज जो सशक्त होगा वो जी लेगा
लूटमार और चमचागिरी से पता नहीं कब फुर्सत मिलेगी हमारे नेताओं को, देश को गिरवी रखने वाले भेडियो से अब डट कर सामना करना होगा और संकल्प लेना होगा की हम सच्चाई के साथ पहले खुद रहना सीखेंगे, दिन दूर नहीं जब कसाब जैसे लोग जनता के फ़सलो का शिकार हो जाये

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