Monday, February 21, 2011
सिर्फ राजधानी कहने से राजधानी नहीं होती है,
अक्सर रायपुर जाता हू छुट्टियों में लेकिन चूँकि परिवार के साथ रहता हू तो व्यावसायिक बातें सोच नहीं पता हू, काफी समय बाद व्यावसायिक कारणों से रायपुर आना हुआ, वो माल जो पहले मुझे मौज मस्ती का अड्डा लगता था मुझे गौरवान्वित करने लगा क्योकि एक बैंक के एम् डी वहां पर अपना ए टी एम लगवाने पहुंचे. लेकिन इस बार कुछ और भी देखा जो में आपको बताना चाहता हू, एक दिन पहले माल से वापस आते समय कुछ युवा बच्चो को सड़क पर मारपीट करते देखा जो मोटर साइकल सड़क के बीच लगाकर हाँथ पांव चला रहे थे, सडको पर ट्राफिक नियमो का उल्लंघन खुले आम दिखा, लोगो को थोड़ा भागते भी देखा जो एक बात का द्योतक है की राजधानी बन गया है शहर, अखबारों को देखा और सहसा सोचने पर बाध्य हुआ की अखबार आगे बढे या पीछे हो गए, कहीं न कहीं कोई एक कड़ी मुझे मिसिंग सी लगी, मेरे भाई पत्रकार बंधू जरा ध्यान दे और नाराज न हो क्योकि में आपके बीच में ही पला बढ़ा हू और थोडा सा अपने शहर के लिए भावुकता रखता हू, वेलेंटाइन मानते हुए महिलाओ का फोटो बड़ी प्राथमिकता से छापा गया प्रेम करना और व्यक्त करना बुराई नहीं लेकिन शहर में कुछ और भी अच्छा जरुर होता होगा जैसे ट्राफिक नियम का उल्लंघन करने वालो का फोटो और इनका परिचय दिया जाये, या फिर ये सोचा जाये कि छत्तीसगढ़ के विकास के लिए क्या किया जा सकता है मसलन बढती हुई महंगाई में क्या होगा और उधोग छेत्र में क्या चुनोतिया आ सकती है पर चर्चा कि जाये. हमारे शहर के बहुत से लोग बाहर शहरो में कार्यरत है, क्या हम उनमे से कुछ लोगो को छत्तीसगढ़ बुलवाकर औधोगिक विकास के बारे में या फिर कमजोर औद्योगिक इकैयो का कैसे पुनरोथान कर सकते है के बारे में विचार किया जाये. सड़के ख़राब है, धुल से सराबोर शहर लेकिन हम सब प्यार से राजधानी कहते है, रायपुर में भविष्य में आने वाले प्रोजेक्ट्स बहुत ही प्रोमिसिंग लग रहे है, एक बात बिलकुल तय है कि काफी गतिविधिया होंगी छत्तीसगढ़ में आने वाले समय में लेकिन क्या हम इसका सही फायदा उठाने में सक्षम है? या फिर हम अपने थोड़े थोड़े से हितो को ध्यान में रखकर काम कर रहे है? मै आव्हान करना चाहता हू उन सब का जो छत्तीसगढ़ कि पहचान भील और तीर कमान से ऊपर उठाकर हेदराबाद और बंगालुरू से करने मै मदद करे या फिर उनसे भी अच्छा बनाने मै मदद करे, संभव है लेकिन आप सब को आगे आना होगा और सोचना होगा हम क्या कर रहे है शहर के साथ. सिर्फ राजधानी कहने से राजधानी नहीं होती है, राजधानी मानने से राजधानी नहीं होती है? शहर को प्यार करने और उसके लोगो मै सिविक सेन्स बढ़ने से ही राजधानी तो क्या पूरे छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी, बम्बई बाज़ार में जो यूरिनल है इतना बदबू मार रहा है जितना २५ साल पहले किसी टाकीज का बदबू मारता था, हमारे यहाँ सुना बहुत है कि रायपुर का मै सर्वश्रेष्ठ बिल्डर हू इत्यादि लेकिन भाइयो शहर में यदि कोई मेहमान आए और उसे इस तरह के यूरिनल मिले तो सोचिये क्या सोचेगा राजधानी के बारे में? उसके सामने एक नल कि टोंटी नहीं है पानी सडको पर बह रहा है क्यों भाई? सोचिये और एक सार्थक पहल का साथ दीजिये, सिर्फ नेताओं कि चाटुकारिता और बाहर से आने वाले लोगो से शहर गुलशन नहीं होगा, हमें शहर को कुछ देना होगा और वो है एक ईमानदार और सार्थक पहल, धन्यवाद्
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment