Wednesday, February 2, 2011

कागजो के अम्बार है यहाँ पर

कागजो के अम्बार है यहाँ पर
कहते है ये दस्तावेज रखने का कमरा है
धूल से ओत प्रोत फाइलों में बंद है किसी का इतिहास
या किसी का भविष्य जो इतिहास बनने से पहले उन हांथो में होगा
जो बिकते है पैसो के लिए, किसी गरीब के पेंशन के पेपर किसी की भविष्य निधि
टेबल लांघते लांघते लिफाफा पतला करते जाती है
उम्रदराज चेहरा लाचार सा बोझिल कदम चलते रहता है इस इंतज़ार में
कभी तो फाइल खुलेगी और मिलेगी मुक्ति इन रक्त पिचाशो से
लेकिन इंतज़ार हमेशा लम्बा होता है आँख में पट्टी बांधकर खुले आम सोता है

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