Friday, February 4, 2011
कुछ मुर्ख इमानदार अपनी करनी का फल भोगते रहते है
कॉर्पोरेट जगत जंगल से कम नहीं होता, इस जंगल का जानवर हमेशा इस फ़िराक में रहता है की कैसे किसी को अकारण मारा जाये और अपना प्रभुत्व कायम रखा जाये, यहाँ पर प्रमोशन के लिए अपने अधिकारी की जी हुजूरी एक अभिभाज्य हिस्सा होती है वही दूसरी और कुछ मुर्ख इमानदार अपनी करनी का फल भोगते रहते है और वो होती है स्वभिमानिता, इस जंगल में किसी जानवर को ये अधिकार नहीं है की वो अपना कद अपने अधिकारी से ऊपर रखे, इस जंगल के आदमी का पूरा ध्यान सिर्फ इस बात पर लगा रहता है की कैसे अपने कार्य को दोगुना और चारगुना कर के दिखाए जो न होते हुए भी मान लिया जाये, फिर मातहत और अधिकारी की मिलीभगत उन्हें बोनस के चार पैसे और ज्यादा दे जाये कुल मिलाकर आप देखेंगे की यहाँ पर काफी बड़े पैमाने पर बुध्धिजीवी दगाबाज बैठे रहते है जो अपने नियोक्ता के और अपने शेयरहोल्डर्स के हितो से समझौता करते है, कम्पनी का लाभ तो भाड़ में गया पहले अपना फायदा देखते है और अपने हिसाब से कम्पनी को लाभप्रद या बीमार करने की छमता रखते है, बड़े खतरनाक होते है ये लोग, आंकड़ो के जाल में अच्छे अच्छे लोगो को उलझाकर अपना हित साध लेते है. दौर इतना ख़राब है की आज ३० वर्ष की आयु के लोगो को हार्ट अटेक आने लगा है लेकिन इन्हें क्या...जरुरत है आप को इस बात को समझने की कि जान चाहिए या फिर बनना कॉर्पोरेट जगत का जंगली शिकार...आप सोचिये आखिर जीवन है आपका
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