Tuesday, February 1, 2011
आप की दुनिया के ये दो मौलिक तत्व
इंसान के आगे बढ़ने की चाह उसे कभी कभी इतना मदांध कर देती है की उसे ये समझ में नहीं आता की गलत क्या है और सही क्या है, वो हर उस आदमी को अपना दुश्मन समझने लगता है जो उसे सही रस्ते पर चलने की प्रेरणा दे, वो अपने सारे गलत काम को सही साबित करने में हमेशा जुटा रहता है, लेकिन इन सारी कवायदों में वो यह भूल जाता है की उसका मूल कार्य क्या था और वो एक ऐसी दिशा में चला जाता है जिस पर उसे तात्कालिक सफलता तो मिलती है लेकिन उस रास्ते का अंत बहुत ज्यादा दूर नहीं होता. इस भौतिक भोगी दुनिया में आप सब खरीद सकते है लेकिन आपकी और परिवार की ख़ुशी नहीं, यदि आप की दुनिया के ये दो मौलिक तत्व आपकी जिन्दगी से गायब है तो मान लीजियेगा आप का जीवन नीरस है, जरुरी नहीं की जैसा आप सोचे वैसा ही आप पाए, कई बार आप अपने विचार के प्रश्न का उत्तर दूसरो के जबाब में ढूँडते है लेकिन जरुरी नहीं आप की विचार रचना से सब सहमत हो. यदि आप अपने विचारो की समीक्छा करते रहे और उसमे दूसरो का विचार शामिल करे तब शायद आप एक रचनात्मक सोच और विचार की और बढ सकते है. जीवन बहुत छोटा है प्यार करिए और ईर्ष्या और छल कपट से दूर रहिये वो ही आपको एक सुकून भरी नींद दे सकता है
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