Wednesday, June 1, 2011

पथ का अंतिम लक्ष्य नहीं है सिंहासन चढ़ते जाना

पथ का अंतिम लक्ष्य नहीं है सिंहासन चढ़ते जाना, हर समाज को लिए साथ में आगे है बढ़ते जाना, बाबा रामदेव ने इस नारे को साथ रखकर जो मुहीम छेड़ी है उसकी आंच सिंहासन पर चढ़े हुए भ्रष्ट लोगो को उस पर ठीक से बैठने नहीं दे रही है, दिग्गी राजा कहते है बाबा को खुला छोड़ा हुआ है नहीं तो जेल में बंद कर देते सरकार डरती तो... दिग्गी राजा लगता है इतिहास से सबक नहीं लिया है आप लोगो ने, आपातकाल में ये ही ध्रिष्ट्ता की थी आपके लोगो ने, आप जिस राज्य के राजनितिक प्रभारी है उत्तरप्रदेश, आपकी कुंद राजनीति का परिणाम भोग रहा है, उखाड़ फेका है लोगो ने आपको वहा से, और बाबा कोई छुट्टा सांड नहीं जिसे आप खुला हुआ घूम रहे है की संज्ञा दे रहे है. मध्यप्रदेश और तत्कालीन छत्तीसगढ़ में क्या विकास किया आप लोगो ने? आदिवासियों की उपेक्छा इतनी की आपने की छत्तीसगढ़ बनते ही उसे कांग्रेस ने नक्सलियों की समस्या से लाद दिया.
आप लोगो से जनता का खड़ा होना और उसका जरिया बनते लोग बर्दाश्त नहीं हो रहे है, काला धन वापस लाना या उसकी मांग करना अपराध है? देश प्रेम की बात करना अपराध है? और राजनितिक लोग जो पूंजीपतियों को अनावश्यक लाभ देते आ रहे है को नंगा करना अपराध है? शायद इस कीचड़ के छीटे आप पर न पड़ जाये और आप जैसे और लोगो पर ना पड जाये आप भयभीत हो रहे है और गुस्से में आपकी जबान अपना संतुलन खो रही है
सामंतवादी और व्यक्तिपूजा आपकी सरकार का मूल मंत्र रहा है और अब आपको ये गले नहीं उतर रहा है की आप लोग जनता के दरबार में कैसे घसीटे जा रहे है क्योकि आप लोग जनता को अपने दरबार में सदियों से घसीटते रहे है...
न मेने कभी रामदेव बाबा का सानिध्य लिया है और ना ही में कोई योग क्लास में जाता हू लेकिन टेलीविजन पर चल रही प्रायोजित और अप्रायोजित खबरे और बयान जरुर सुनता हू, आइये विषवमन रोकिये और शामिल होइए जनता के साथ ....जय हो

Sunday, May 1, 2011

The Bang ओबामा भाई

ओबामा भाई थोडा और जानकारी दो ओसामा के बारे में, सबसे पहले बधाईया, आप ने १० साल बाद ढूंड कर मारा ओसामा को वो भी पकिस्तान के अन्दर, अब मन में ये जिजीविषा है कि दो दिन पहले एक समाचार आया था कि ओसामा को यदि मारा गया तो वो अमेरिका में परमाणु बम फोड़ देगा, फिर उसके चौबीस घंटे बाद समाचार आता है कि ओसामा मारा गया, अब ये बताइये आपने उसे मारे जाने कि खबर कि थी या फिर उसे पकिस्तान कि ख़ुफ़िया सर्विस ने बता दिया था, थोडा ये भी बताइये कि आठ घंटो के आपरेशन में आपने उसका डी एन ए भी टेस्ट करा लिया और घोषणा कर दी ओसामा मारा गया!!, ओबेटाबाद पकिस्तान का सैन्य अड्डा है वह पर कोई बड़ी हवेली में पिछले कई दिनों से रह रहा था और लोगो को पता नहीं था? इस्लामाबाद से महज १७० किलोमीटर दूर आपने उसे ढूंडा और ठोक दिया वाह, अब सवाल है कि क्या आपने उसे पहले ही पकड़ लिया था? या फिर आपने पकिस्तान को बन्दुक कि नोक पर उसे मारने राजी किया?
हमारी भी एक व्यथा है, आपने कहा ओसामा ने अमेरिकेन लोगो को मारा हमारे यहाँ भी कुछ लोगो ने निरीह लोगो को मारा उनमे से एक पाकिस्तानी हत्यारा पकड़ा भी गया और पिछले ३ सालो से बंद है हमारी जेल में, क्या आप हमारी मदद करेंगे? कुछ हमारे दुश्मन पकिस्तान में भी है क्या आप उन्हें पकड़कर हमें इन्साफ दिलवाएंगे? माफ़ करियेगा हम आपसे कह रहे है और आप भी सोच रहे होंगे दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र आपसे मदद मांग रहा है, क्या करे साहब गणतंत्र का ये ही प्रॉब्लम है कोई यदि सही आवाज़ भी उठाये तो वो अन्ना हजारे या उनकी टीम जैसा भुगतेगा ! कौन है यहाँ जनता के बारे में सोचने के लिए? आप ही कुछ करो आखिर आप ने दिखा दिया कि दबंग कौन है ! लेकिन जरा मेरे संशय दूर करियेगा जरुर

Sunday, March 27, 2011

लगाओ रंगमंच के सेट बनाओ पूर्व खिलाडियों को उसका किरदार

करो टी आर पी के लिए नौटंकी
लगाओ रंगमंच के सेट बनाओ पूर्व खिलाडियों को उसका किरदार
करो घृणा की बाते और फेलाओ उन्माद
है न तुम्हारे लिए १६० करोड़ जनता हिन्दुस्तान और पकिस्तान की
बनो मदारी तुम और नचाओ आप जनता को सिर्फ एक खेल के कारण
दुआ करता हू की बेबस खिलाडी दोनों टीम के किसी दुर्घटना का शिकार न हो
तुमने तो अस्पताल में भी लाइव सेट चला रखे है
मेरा भारत मेरा है पकिस्तान भी कभी मेरा था
जो मेरा था अब गैर केसे हो गया ये समझ नहीं पाटा हु
एक तरफ चलाओ अमन की आशा के नाटक
दूसरी और फेलाओ नफरते दोनो ओर
मुद्दे गरीबी और आतंक के सुलगते रहे गुमशुदगी में सब तरफ
तुम्हारे यहाँ आतंक तो हमारे यहाँ भ्रस्ट्राचार चलो दोनों भूलते है इन्हें
तैयारी करे एक खेल की जिसके पीछे पूरी दुनिया पागल सी लगती है

Thursday, March 10, 2011

दुष्यंत ने कहा था " बस इतनी सी बात पर हक़ की जुबा न काटिए

दुष्यंत ने कहा था " बस इतनी सी बात पर हक़ की जुबा न काटिए आप का नाम याद था आपका नाम ले लिया" कितनी तार्किक थी ये बात, गाहे बगाहे आप उलझनों में पड़ जाते है, पूर्वाग्रह बहुत ख़राब होता है हर किसी को लगता है कि जो वो सोच रहा है वो सही है लेकिन वो ये नहीं जनता या जानना चाहता कि वास्तु स्थिति क्या है, कई बार हम अपने हिसाब से चरित्रों का मूल्यांकन करते है चाहे हम हमाम में कितने भी नंगे हो लेकिन दूसरों कि छीछा लेदर करने में या उसके बारे में अपना व्यक्तिगत कमेन्ट देने में नहीं हिचकिचाते, कुझे कही पर पढ़ी हुई एक बात याद आती है " एक बार ट्रेन में कुछ लोग ए सी काम्पर्टमेंट में यात्रा कर रहे थे, कोई पुस्तक पढ़ रहा था तो कोई गाने सुन रहा था, एक स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो एक आदमी दो बच्चो के साथ चढ़ा जो काफी रो रहे थे, ये चुपचाप बेठे लोगो को चुभा और उन्होंने इस व्यक्ति से कहा चुप करिए अपने बच्चो को, व्यक्ति ने गंभीरता से बड़े आर्त स्वर में जबाब दिया क्या करू, अस्पताल से आ रहा हू जहा पर अभी अभी इन बच्चो ने अपनी माँ को मरते देखा है कैसे चुप कराऊ आप बताइये" शर्मनाक उदाहरण हमारी मानसिक स्थिति का इससे बड़ा नहीं हो सकता.
ये बात मै यहाँ पर इसीलिए उल्लेखित कर रहा हू कि नेट पर हम एक दूसरे को जानते नहीं बस लिखने के और संवाद करने के आधार पर विश्वास पूर्वक दोस्त बना लेते है फिर उनके बारे मै अपनी विचारधारा व्यक्त करते है, हर व्यक्ति यहाँ पर बुरा नहीं है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हर कोई पाक साफ़ है, इस दौर मै जब इंसान को एक अच्चा जरिया मिल रहा है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का हमारी जबाबदारी बनती है कि हम अपनी भाषा और उसके सम्प्रेषण में बहुत ही सजग रहे, मुझे नेट पर कई बार कुछ ऐसा बोला गया जो मै नहीं हू लेकिन उन सब को मै माफ़ करता हू क्योकि उन्हें मै जनता नहीं और जिसे आप जानते नहीं उनकी बातो का बुरा क्या मानना, लेकिन एक बात और कहता हू यदि आप किसी का सम्मान नहीं कर सके तो उसका अपमान करने का हक़ आपको नहीं है, अक्सर पढता हू भाषा कभी कभी शालीन नहीं होती और वो ये बताती है कि आप किस कुल या परिवार से आते है और किन संस्कारों मै पाले बढे है
यदि आप कर सके तो इतना जरुर सोचे हम इंसान है और आपस मै हमें प्यार और स्नेह से रहना चाहिए और नहीं रह सकते तो एक दूसरे को भूल कर आगे बढ़ना चाहिए बिनी किसी गिले और शिकवे के, नफरत और पूर्वाग्रह आप को ही अपने अन्दर नष्ट करना होगा क्योकि ये आपके दिमाग कि उपज है

दुष्यंत ने कहा था " बस इतनी सी बात पर जुबा न काटिए

दुष्यंत ने कहा था " बस इतनी सी बात पर जुबा न काटिए आप का नाम याद था आपका नाम ले लिया" कितनी तार्किक थी ये बात, गाहे बगाहे आप उलझनों में पड़ जाते है, पूर्वाग्रह बहुत ख़राब होता है हर किसी को लगता है कि जो वो सोच रहा है वो सही है लेकिन वो ये नहीं जनता या जानना चाहता कि वास्तु स्थिति क्या है, कई बार हम अपने हिसाब से चरित्रों का मूल्यांकन करते है चाहे हम हमाम में कितने भी नंगे हो लेकिन दूसरों कि छीछा लेदर करने में या उसके बारे में अपना व्यक्तिगत कमेन्ट देने में नहीं हिचकिचाते, कुझे कही पर पढ़ी हुई एक बात याद आती है " एक बार ट्रेन में कुछ लोग ए सी काम्पर्टमेंट में यात्रा कर रहे थे, कोई पुस्तक पढ़ रहा था तो कोई गाने सुन रहा था, एक स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो एक आदमी दो बच्चो के साथ चढ़ा जो काफी रो रहे थे, ये चुपचाप बेठे लोगो को चुभा और उन्होंने इस व्यक्ति से कहा चुप करिए अपने बच्चो को, व्यक्ति ने गंभीरता से बड़े आर्त स्वर में जबाब दिया क्या करू, अस्पताल से आ रहा हू जहा पर अभी अभी इन बच्चो ने अपनी माँ को मरते देखा है कैसे चुप कराऊ आप बताइये" शर्मनाक उदाहरण हमारी मानसिक स्थिति का इससे बड़ा नहीं हो सकता.
ये बात मै यहाँ पर इसीलिए उल्लेखित कर रहा हू कि नेट पर हम एक दूसरे को जानते नहीं बस लिखने के और संवाद करने के आधार पर विश्वास पूर्वक दोस्त बना लेते है फिर उनके बारे मै अपनी विचारधारा व्यक्त करते है, हर व्यक्ति यहाँ पर बुरा नहीं है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हर कोई पाक साफ़ है, इस दौर मै जब इंसान को एक अच्चा जरिया मिल रहा है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का हमारी जबाबदारी बनती है कि हम अपनी भाषा और उसके सम्प्रेषण में बहुत ही सजग रहे, मुझे नेट पर कई बार कुछ ऐसा बोला गया जो मै नहीं हू लेकिन उन सब को मै माफ़ करता हू क्योकि उन्हें मै जनता नहीं और जिसे आप जानते नहीं उनकी बातो का बुरा क्या मानना, लेकिन एक बात और कहता हू यदि आप किसी का सम्मान नहीं कर सके तो उसका अपमान करने का हक़ आपको नहीं है, अक्सर पढता हू भाषा कभी कभी शालीन नहीं होती और वो ये बताती है कि आप किस कुल या परिवार से आते है और किन संस्कारों मै पाले बढे है
यदि आप कर सके तो इतना जरुर सोचे हम इंसान है और आपस मै हमें प्यार और स्नेह से रहना चाहिए और नहीं रह सकते तो एक दूसरे को भूल कर आगे बढ़ना चाहिए बिनी किसी गिले और शिकवे के, नफरत और पूर्वाग्रह आप को ही अपने अन्दर नष्ट करना होगा क्योकि ये आपके दिमाग कि उपज है

दुष्यंत ने कहा था " बस इतनी सी बात पर जुबा न काटिए

दुष्यंत ने कहा था " बस इतनी सी बात पर जुबा न काटिए आप का नाम याद था आपका नाम ले लिया" कितनी तार्किक थी ये बात, गाहे बगाहे आप उलझनों में पड़ जाते है, पूर्वाग्रह बहुत ख़राब होता है हर किसी को लगता है कि जो वो सोच रहा है वो सही है लेकिन वो ये नहीं जनता या जानना चाहता कि वास्तु स्थिति क्या है, कई बार हम अपने हिसाब से चरित्रों का मूल्यांकन करते है चाहे हम हमाम में कितने भी नंगे हो लेकिन दूसरों कि छीछा लेदर करने में या उसके बारे में अपना व्यक्तिगत कमेन्ट देने में नहीं हिचकिचाते, कुझे कही पर पढ़ी हुई एक बात याद आती है " एक बार ट्रेन में कुछ लोग ए सी काम्पर्टमेंट में यात्रा कर रहे थे, कोई पुस्तक पढ़ रहा था तो कोई गाने सुन रहा था, एक स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो एक आदमी दो बच्चो के साथ चढ़ा जो काफी रो रहे थे, ये चुपचाप बेठे लोगो को चुभा और उन्होंने इस व्यक्ति से कहा चुप करिए अपने बच्चो को, व्यक्ति ने गंभीरता से बड़े आर्त स्वर में जबाब दिया क्या करू, अस्पताल से आ रहा हू जहा पर अभी अभी इन बच्चो ने अपनी माँ को मरते देखा है कैसे चुप कराऊ आप बताइये" शर्मनाक उदाहरण हमारी मानसिक स्थिति का इससे बड़ा नहीं हो सकता.
ये बात मै यहाँ पर इसीलिए उल्लेखित कर रहा हू कि नेट पर हम एक दूसरे को जानते नहीं बस लिखने के और संवाद करने के आधार पर विश्वास पूर्वक दोस्त बना लेते है फिर उनके बारे मै अपनी विचारधारा व्यक्त करते है, हर व्यक्ति यहाँ पर बुरा नहीं है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हर कोई पाक साफ़ है, इस दौर मै जब इंसान को एक अच्चा जरिया मिल रहा है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का हमारी जबाबदारी बनती है कि हम अपनी भाषा और उसके सम्प्रेषण में बहुत ही सजग रहे, मुझे नेट पर कई बार कुछ ऐसा बोला गया जो मै नहीं हू लेकिन उन सब को मै माफ़ करता हू क्योकि उन्हें मै जनता नहीं और जिसे आप जानते नहीं उनकी बातो का बुरा क्या मानना, लेकिन एक बात और कहता हू यदि आप किसी का सम्मान नहीं कर सके तो उसका अपमान करने का हक़ आपको नहीं है, अक्सर पढता हू भाषा कभी कभी शालीन नहीं होती और वो ये बताती है कि आप किस कुल या परिवार से आते है और किन संस्कारों मै पाले बढे है
यदि आप कर सके तो इतना जरुर सोचे हम इंसान है और आपस मै हमें प्यार और स्नेह से रहना चाहिए और नहीं रह सकते तो एक दूसरे को भूल कर आगे बढ़ना चाहिए बिनी किसी गिले और शिकवे के, नफरत और पूर्वाग्रह आप को ही अपने अन्दर नष्ट करना होगा क्योकि ये आपके दिमाग कि उपज है

दुष्यंत ने कहा था " बस इतनी सी बात पर जुबा न काटिए

दुष्यंत ने कहा था " बस इतनी सी बात पर जुबा न काटिए आप का नाम याद था आपका नाम ले लिया" कितनी तार्किक थी ये बात, गाहे बगाहे आप उलझनों में पड़ जाते है, पूर्वाग्रह बहुत ख़राब होता है हर किसी को लगता है कि जो वो सोच रहा है वो सही है लेकिन वो ये नहीं जनता या जानना चाहता कि वास्तु स्थिति क्या है, कई बार हम अपने हिसाब से चरित्रों का मूल्यांकन करते है चाहे हम हमाम में कितने भी नंगे हो लेकिन दूसरों कि छीछा लेदर करने में या उसके बारे में अपना व्यक्तिगत कमेन्ट देने में नहीं हिचकिचाते, कुझे कही पर पढ़ी हुई एक बात याद आती है " एक बार ट्रेन में कुछ लोग ए सी काम्पर्टमेंट में यात्रा कर रहे थे, कोई पुस्तक पढ़ रहा था तो कोई गाने सुन रहा था, एक स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो एक आदमी दो बच्चो के साथ चढ़ा जो काफी रो रहे थे, ये चुपचाप बेठे लोगो को चुभा और उन्होंने इस व्यक्ति से कहा चुप करिए अपने बच्चो को, व्यक्ति ने गंभीरता से बड़े आर्त स्वर में जबाब दिया क्या करू, अस्पताल से आ रहा हू जहा पर अभी अभी इन बच्चो ने अपनी माँ को मरते देखा है कैसे चुप कराऊ आप बताइये" शर्मनाक उदाहरण हमारी मानसिक स्थिति का इससे बड़ा नहीं हो सकता.
ये बात मै यहाँ पर इसीलिए उल्लेखित कर रहा हू कि नेट पर हम एक दूसरे को जानते नहीं बस लिखने के और संवाद करने के आधार पर विश्वास पूर्वक दोस्त बना लेते है फिर उनके बारे मै अपनी विचारधारा व्यक्त करते है, हर व्यक्ति यहाँ पर बुरा नहीं है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हर कोई पाक साफ़ है, इस दौर मै जब इंसान को एक अच्चा जरिया मिल रहा है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का हमारी जबाबदारी बनती है कि हम अपनी भाषा और उसके सम्प्रेषण में बहुत ही सजग रहे, मुझे नेट पर कई बार कुछ ऐसा बोला गया जो मै नहीं हू लेकिन उन सब को मै माफ़ करता हू क्योकि उन्हें मै जनता नहीं और जिसे आप जानते नहीं उनकी बातो का बुरा क्या मानना, लेकिन एक बात और कहता हू यदि आप किसी का सम्मान नहीं कर सके तो उसका अपमान करने का हक़ आपको नहीं है, अक्सर पढता हू भाषा कभी कभी शालीन नहीं होती और वो ये बताती है कि आप किस कुल या परिवार से आते है और किन संस्कारों मै पाले बढे है
यदि आप कर सके तो इतना जरुर सोचे हम इंसान है और आपस मै हमें प्यार और स्नेह से रहना चाहिए और नहीं रह सकते तो एक दूसरे को भूल कर आगे बढ़ना चाहिए बिनी किसी गिले और शिकवे के, नफरत और पूर्वाग्रह आप को ही अपने अन्दर नष्ट करना होगा क्योकि ये आपके दिमाग कि उपज है