पथ का अंतिम लक्ष्य नहीं है सिंहासन चढ़ते जाना, हर समाज को लिए साथ में आगे है बढ़ते जाना, बाबा रामदेव ने इस नारे को साथ रखकर जो मुहीम छेड़ी है उसकी आंच सिंहासन पर चढ़े हुए भ्रष्ट लोगो को उस पर ठीक से बैठने नहीं दे रही है, दिग्गी राजा कहते है बाबा को खुला छोड़ा हुआ है नहीं तो जेल में बंद कर देते सरकार डरती तो... दिग्गी राजा लगता है इतिहास से सबक नहीं लिया है आप लोगो ने, आपातकाल में ये ही ध्रिष्ट्ता की थी आपके लोगो ने, आप जिस राज्य के राजनितिक प्रभारी है उत्तरप्रदेश, आपकी कुंद राजनीति का परिणाम भोग रहा है, उखाड़ फेका है लोगो ने आपको वहा से, और बाबा कोई छुट्टा सांड नहीं जिसे आप खुला हुआ घूम रहे है की संज्ञा दे रहे है. मध्यप्रदेश और तत्कालीन छत्तीसगढ़ में क्या विकास किया आप लोगो ने? आदिवासियों की उपेक्छा इतनी की आपने की छत्तीसगढ़ बनते ही उसे कांग्रेस ने नक्सलियों की समस्या से लाद दिया.
आप लोगो से जनता का खड़ा होना और उसका जरिया बनते लोग बर्दाश्त नहीं हो रहे है, काला धन वापस लाना या उसकी मांग करना अपराध है? देश प्रेम की बात करना अपराध है? और राजनितिक लोग जो पूंजीपतियों को अनावश्यक लाभ देते आ रहे है को नंगा करना अपराध है? शायद इस कीचड़ के छीटे आप पर न पड़ जाये और आप जैसे और लोगो पर ना पड जाये आप भयभीत हो रहे है और गुस्से में आपकी जबान अपना संतुलन खो रही है
सामंतवादी और व्यक्तिपूजा आपकी सरकार का मूल मंत्र रहा है और अब आपको ये गले नहीं उतर रहा है की आप लोग जनता के दरबार में कैसे घसीटे जा रहे है क्योकि आप लोग जनता को अपने दरबार में सदियों से घसीटते रहे है...
न मेने कभी रामदेव बाबा का सानिध्य लिया है और ना ही में कोई योग क्लास में जाता हू लेकिन टेलीविजन पर चल रही प्रायोजित और अप्रायोजित खबरे और बयान जरुर सुनता हू, आइये विषवमन रोकिये और शामिल होइए जनता के साथ ....जय हो
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